शराब प्रेमियों के लिए आई बुरी खबर, शराब कीमतों में हो सकती है बढ़ोतरी Liquor Price Increase

Liquor Price Increase: मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में सोमवार को हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दे दी गई। इस नीति के तहत राज्य सरकार ने विदेशी शराब की ...

Ravi Yadav

Liquor Price Increase: मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में सोमवार को हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी दे दी गई। इस नीति के तहत राज्य सरकार ने विदेशी शराब की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। नई नीति के अनुसार भारत में बनी विदेशी शराब (ISFL) और इंपोर्टेड विदेशी शराब (IFL) अब प्रति बोतल 20 से 30 रुपये तक महंगी हो जाएगी। यह बदलाव अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगा।

देसी शराब की कीमत में कोई बदलाव नहीं

जहां विदेशी शराब के दाम बढ़ाए गए हैं। वहीं देसी शराब की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि देसी शराब का कोटा बढ़ाकर 8.79 करोड़ प्रूफ लीटर कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष 8.53 करोड़ प्रूफ लीटर था। इससे साफ है कि सरकार ने मांग को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति बढ़ाने का फैसला लिया है।

बीयर दुकानों की फीस में बढ़ोतरी

नई नीति के तहत बीयर की दुकानों के लाइसेंस शुल्क में 5,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। पिछले वर्ष सरकार ने इसे दो लाख रुपये प्रति दुकान से घटाकर 25,000 रुपये कर दिया था। अब इसे बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति दुकान कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

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₹12,800 करोड़ का नया लक्ष्य

आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल चीमा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में सरकार ने ₹11,020 करोड़ का राजस्व लक्ष्य रखा था। जिसे पूरा कर लिया गया है। अब अगले वित्तीय वर्ष के लिए यह लक्ष्य बढ़ाकर ₹12,800 करोड़ कर दिया गया है। यानी करीब ₹1,780 करोड़ की अतिरिक्त बढ़ोतरी का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार का अनुमान है कि इस बार एक्साइज से करीब ₹11,600 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो सकता है।

सिंगल माल्ट व्हिस्की निर्माण की अनुमति

नई नीति में एक अहम बदलाव यह भी है कि राज्य सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को सिंगल माल्ट व्हिस्की बनाने की अनुमति देने का फैसला किया है। सिंगल माल्ट एक प्रीमियम श्रेणी की शराब मानी जाती है, जो एक ही प्रकार के अनाज (जौ) से तैयार की जाती है। इस फैसले से राज्य में शराब उद्योग को बढ़ावा मिलने और निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

ग्रुपों की संख्या यथावत

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस वर्ष भी शराब दुकानों के ग्रुपों की संख्या 207 ही रहेगी। इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार संरचना में बड़े बदलाव के बजाय राजस्व और संचालन सुधार पर ध्यान दे रही है।

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डिस्टिलरी संचालन समय में बदलाव

डिस्टिलरी की डिस्पैच और ऑपरेटिंग घंटों को बढ़ाने की लंबे समय से चली आ रही मांग को भी सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब डिस्टिलरी को शाम 5 बजे तक संचालन की अनुमति होगी। हालांकि कुछ अन्य राज्यों में यह समय रात 10 बजे तक है। सरकार का मानना है कि संचालन समय बढ़ाने से उत्पादन और वितरण में सुविधा होगी।

आम उपभोक्ताओं पर क्या असर?

विदेशी शराब की कीमतों में 20 से 30 रुपये की बढ़ोतरी से आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा। हालांकि देसी शराब के दाम स्थिर रहने से ग्रामीण और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं पर असर कम होगा।

सरकार की रणनीति क्या है?

नई आबकारी नीति से साफ है कि सरकार राजस्व बढ़ाने और शराब उद्योग को नियंत्रित ढांचे में रखने की रणनीति अपना रही है। राजस्व लक्ष्य बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन और लाइसेंस व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

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